ये कमबख्त समाज ।।



जीना चाहते हों या सिर्फ जी रहे हो जीना अगर है तो खुद की करो नही तो हर मोड़ पर हर रोड पर यूं कहें तो हर फ़ोन पर तुम्हारे अपने तुम्हे यह बता देंगे की तुम्हे क्या करना है क्या नही भले खुद जीवन में एक तिनका तक नही उखाड़ी हो ।

उन्हें हर बात से प्रॉब्लम है तुम्हारे चलने से तुम्हारे घूमने से तुम्हारे हर एक रवैए से....

मैंने सुना है और मैंने देखा भी है

तुम कुछ बेहतर पहनो तो वो तुम्हारे बारे में बोलेंगे बाप के पैसे पर फुटानी करता है ....

कुछ कामचलाऊ पहनो तब भी वो बाज नही आते उन्हें अब भी दिक्कत है कि तुम ज्यादे कंजूसी कर रहै हो ....

उन्हें हर बात से दिक्कत है वो हर समय तुमपर नजर जमाएं हुए है तुम्हें तुम नही जितना देखते वो तुम्हे देखते हैं ।

तुम क्या करते हो वो उसकी बातें बनाते है...
तुम क्या करने वाले हो उसकी हवा उड़ाते है...

इसलिए इनकी बातों को सुनोगे कहि का नही रहोगे...
खुद के लिए कुछ करोगे जो चाहोगे वो पाओगे ।.....

बहुत बातें और भी है फिर कभी .....