"मेरी तन्हाई और तुम्हारी याद"

 "मेरी तन्हाई और तुम्हारी याद" , poem, हिंदी कविता, hindi poem, hindi कविता,

मेरी तन्हाई और तुम्हारी याद
दोनों ने साज़िश कर ली है मेरे ख़िलाफ़
जब भी मैं तन्हा होता हूं  
वो आ बैठती हैं मेरे पास  
करने लगती हैं बेइंतहा बातें   
कभी अपनी तो कभी जहां की बातें  
कभी छुपा लेती है अपने चेहरे को  
अपनी ही ज़ुल्फ़ों के ओट तले  
कभी निहारती है मुझे  
अपने अनुराग भरे पलकों के तले 
ले लेती हैं मेरे बोसे  
और फेरती है उंगलियां अपनी  
मेरे माथे के शिकन पर  
ये दूर नहीं होतीं मुझसे  
जैसे तुम हो जाती हो  
पर वो सुकून नहीं मिलता इनसे  
जो तुम दे जाती हो अपने साथ  
मेरी तन्हाई और तुम्हारी याद ।।
                Leena jha के कलम से ...

#रचना अच्छा लगे तो शेयर कर लेखक/लेखिका का उत्साह बढ़ाए।

अगर आप भी हिंदी अथवा मैथिली में कविता लिखते है तो हमे व्हाट्सएप ( 8406960029),
ईमेल करे ( news@mithilatak.com ) करें।

अपनी रचनाओं को और लोगों तक हमारे माध्यम से शेयर करे ।

Post a Comment

आपके प्यार और स्नेह के लिए धन्यवाद mithilatak के साथ बने रहे |

favourite category

...
test section describtion

Whatsapp Button works on Mobile Device only